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लोकसभा चुनाव परिणाम से पहले भाजपा में नए समीकरण: योगी आदित्यनाथ के विकल्प के तौर पर उभरते डॉ. मोहन यादव


न्यूज डेस्क: देश में 4 जून को आने वाले लोकसभा चुनाव परिणामों से पहले सत्तारूढ़ दल भाजपा में नए प्रयोग तेजी से चल रहे हैं। हाल ही में भाजपा ने संघ से दूरियां बनाने का ऐलान किया था, और अब पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकल्प के तौर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को नया यादव नेता बनाने की मुहिम में जुटी है।


योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और संभावित चुनौतियां

योगी आदित्यनाथ ने अपने नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को एक नया स्वरूप दिया है। उनका शासन मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि दूसरे राज्यों में भी लोकप्रिय हो रहा है। यह लोकप्रियता उन्हें मोशा की जोड़ी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह) के लिए एक संभावित चुनौती बना रही है। लोकसभा चुनाव के हर चरण में भाजपा प्रत्याशियों ने मोशा के बाद सबसे अधिक मांग योगी आदित्यनाथ की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि वह पार्टी के भीतर एक मजबूत नेता बन चुके हैं।


डॉ. मोहन यादव का उभार और रणनीति

चुनाव के पांचवें चरण के बाद, जहां-जहां से योगी की मांग आयी, वहां-वहां मोशा की जोड़ी ने विकल्प के तौर पर मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजा। विशेष रूप से यादव बाहुल्य वाले राज्यों और चुनाव क्षेत्रों में उन्हें प्रमुखता दी गई। डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बने छह महीने से अधिक का समय हो गया है, और उनकी पहचान एक यादव नेता के रूप में तेजी से बन रही है। उन्होंने भी योगी की तरह प्रदेश में अल्पसंख्यकों को चेतावनी दी है, जिससे उनकी छवि और मजबूत हो रही है।


भाजपा और आरएसएस के बीच संबंधों में बदलाव

भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब पार्टी को संघ की जरूरत नहीं है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के माध्यम से यह घोषणा की गई कि भाजपा स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगी। इससे आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में भी चिंता बढ़ी है, क्योंकि संघ को आशंका है कि 4 जून के बाद भाजपा फिर से बहुमत में आई तो मोशा की जोड़ी संघ को भी अपने अधीन कर सकती है।


शिवराज सिंह चौहान की स्थिति और नई चुनौतियां

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जो पहले मध्य प्रदेश में भाजपा का चेहरा थे, को हटाकर डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह कदम भी पार्टी के आंतरिक समीकरणों को दर्शाता है। शिवराज सिंह चौहान का कद एक मुख्यमंत्री के रूप में बहुत बढ़ गया था, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प मानने की वजह से राज्य सत्ता से बेदखल कर दिया गया।


आगामी चुनाव परिणाम और भाजपा की रणनीति

अब तक के संकेतों से लगता है कि भाजपा का सत्ता में बने रहना आसान नहीं है, लेकिन 'मोदी है तो मुमकिन है' के नारे के साथ भाजपा ईवीएम की मदद से सत्ता सिंहासन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पिछले साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यह करिश्मा दिखाया था, जब पूरा देश कांग्रेस की वापसी की उम्मीद कर रहा था। मुमकिन है कि लोकसभा चुनाव में भी यही सब फिर से दोहराया जाए।



अभी सभी की नजर 25 मई को समाप्त हुए मतदान के छठवें चरण के बाद अंतिम चरण पर टिकी हुई है। अंतिम चरण में जिन राज्यों में मतदान होना है, वहां यादव बाहुल्य वाली सीटों पर मोशा मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर रही है। योगी से भी ज्यादा महत्व मोहन यादव को दिया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि देश में अगला मॉडल गुजरात का चलेगा या उत्तर प्रदेश का? उत्तर प्रदेश का चलेगा या मध्य प्रदेश का? आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा की रणनीति कितनी सफल होती है और पार्टी के आंतरिक समीकरण कैसे बदलते हैं।